✦ नक्षत्र 1 / 27 ✦
अश्विनी
"घोड़े से जन्मी" — तेज़ और सबसे पहली

स्वामी ग्रह
केतु
देवता
अश्विनी कुमार (जुड़वां घुड़सवार वैद्य)
प्रतीक
घोड़े का सिर
गण
देव
नाड़ी
आदि
राशिचक्र में विस्तार
0°00′–13°20′ मेष
अश्विनी पहला नक्षत्र है, जहाँ से राशिचक्र शुरू होता है. इसका स्वामी केतु है और देवताओं के जुड़वाँ वैद्य अश्विनी कुमार इसके देवता हैं. यहाँ सब कुछ गति का है: तेज़, सहज और सबसे पहले चल पड़ने वाला.
व्यक्तित्व
अश्विनी में चंद्रमा हो तो आप सोच पूरी करने से पहले ही कदम उठा लेते हैं. जब किसी स्थिति में सबसे पहले चलने वाला चाहिए, तब यह सचमुच बड़ी खूबी है. इंतज़ार आपको खटकता है, और जहाँ कुछ ठीक करना हो, चाहे कोई व्यक्ति हो, कोई समस्या या कोई बिगड़ी व्यवस्था, वहाँ आप खिंचे चले जाते हैं.
करियर और जीवन का उद्देश्य
अश्विनी कुमार वैद्य थे, और यह बात सीधे दिखती है: चिकित्सा, आपातकालीन सेवा और हर तरह का उपचार-कार्य इस चंद्रमा को रास आता है. वैसे ही वह हर काम जिसमें पहले होना फ़ायदा देता है, जैसे अपना कारोबार शुरू करना, खेल, नई राह का शोध या बचाव कार्य.
रिश्ते
प्रेम में अश्विनी गर्मजोशी वाला और सीधा है, और अधीर भी. जिस साथी को धीमी, सोची-समझी पहल चाहिए, उसे शुरू में यह ज़्यादा लग सकता है. निष्ठा एक बार कमा ली जाए तो गहरी चलती है, और आपको वही बनना अच्छा लगता है जो अपनों पर संकट आने पर सबसे पहले पहुँचे.
ताक़त
- •ज़रूरत के समय तेज़, निर्णायक कदम
- •उपचार करने और चीज़ें ठीक करने की देन
- •इजाज़त का इंतज़ार किए बिना सबसे पहले चलने का साहस
- •असफलता के बाद जल्दी संभल जाना
सुधार के क्षेत्र
- •अधीरता आवेग जैसी दिख सकती है, इसलिए बड़े फ़ैसलों से पहले ठहरें
- •सब कुछ ठीक करने की ललक दूसरों की अपनी प्रक्रिया को दबा सकती है
- •बेचैनी को सिर्फ़ सोच बदलने से नहीं, शारीरिक निकास से राहत मिलती है
अनुकूलता
अश्विनी देव गण का नक्षत्र है और दूसरे देव नक्षत्रों के साथ सबसे सहज चलता है. मनुष्य गण वालों के साथ भी साझा ज़मीन मिलती है, और राक्षस गण के साथी के साथ दोनों ओर थोड़ी ज़्यादा मेहनत से निभ सकती है. पूरा अष्टकूट मिलान दोनों कुंडलियों से ही होता है.
पूरी अष्टकूट अनुकूलता जांचेंसुझाव
अश्विनी का स्वामी केतु है — केतु के उपाय देखें (मंत्र, दान और रोज़ की साधना)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चंद्र का अश्विनी में होना क्या मतलब रखता है?
आपका भावनात्मक और सहज स्वभाव अश्विनी के असर में रहता है: तुरंत कदम उठाने वाला, जल्दी ठीक करने वाला और सबसे पहले होने की ओर खिंचा हुआ. आपका सूर्य, लग्न या दूसरे ग्रह अश्विनी में हों तो जीवन के दूसरे क्षेत्रों पर भी यही रंग चढ़ता है.
क्या अश्विनी अच्छा नक्षत्र है?
हर नक्षत्र में ताकत भी होती है और कमज़ोर कोने भी. अश्विनी को शास्त्रों में शुरुआत, उपचार और साहस के लिए शुभ माना गया है, बशर्ते इसकी अधीरता को कोई स्वस्थ निकास मिले.
अश्विनी का स्वामी कौन सा ग्रह है?
केतु. अश्विनी उन तीन नक्षत्रों (मघा और मूल के साथ) में पहला है जिनका स्वामी केतु है, और हर एक विंशोत्तरी दशा के नौ-नक्षत्र चक्र की शुरुआत करता है.
क्या अश्विनी आपका नक्षत्र है?
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